A2zvashikaranmantra World Famous Vashikaran Mantra Expert india 2019: Vastu Tips

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Monday, September 10, 2018

Vastu Tips For Children

September 10, 2018
Vastu Tips For Children

Vastu Tips For Children & Room



The adept course for developing youngsters' room is west. Aside from that, west, northwest, upper east
and southeast headings can likewise be utilized for developing kids' room. Thoroughly keep away from
the southwest bearing.

In a kid's room, the bed can be put in the southwest corner. Place the bed in such a route, to the point
that your tyke has his/ her head confronting the east or south course, while resting.

As a piece of Vastu rules for kids room, it is prescribed to abstain from putting the mirror on the inverse
side of the bed.

In the event that you need to keep furniture things in a kids' room, keep them a couple creeps far from
the divider. Try not to have the furniture appended to the divider, as it hinders the stream of positive
vitality.

The study work area ought to be set in such a way, to the point that the youngster confronts east, north
or upper east corner while contemplating. East is the most proper heading, as it clears path for
improved focus.

Abstain from putting a TV or PC straightforwardly inverse the bed. The TV set or the PC screen, when
exchanged off, mirrors the bed, much the same as a mirror, and is an awful sign.

In the event that you must have a mirror and a TV in the room, have them either on the left or the right
half of the bed.

The way to kids' room ought not be precisely inverse to the bed. Maybe, have a go at setting it a point
from the entryway.

Sharp edges and directing alcoves include something that is better maintained a strategic distance from
in youngsters' room.

The focal point of kids' room ought to dependably be discharge. Attempt to abstain from setting
something in there.

The almirahs and cupboards ought to dependably be situated in south or west course of the room.

Up-lighters, when put in the southeast corner of kids' room, help advance wellbeing and create positive
vitality.

Sharp lights and in addition spot lights ought to never at any point be utilized as a part of kids' room, as
they have a tendency to make mental strain.

The entryways and in addition windows of youngsters' room are best outlined in the east or north. The
windows ought to be inverse to the entryway.

Green shading demonstrates the best for kids' room, as it is connected with freshness and peace and
builds mental aptitude also.

Vastu Tips For Money Growth | Vastu Shastra For Money | Vastu For Wealth And Prosperity

September 10, 2018
Vastu Tips For Money Growth | Vastu Shastra For Money | Vastu For Wealth And Prosperity
The entire sole point of vastu tips for wealth is to keep lord Kuber content and satisfied at all times. Kuber jee is the God of riches and think about what will he do in the event that he is glad and satisfied with you? He will give every one of you the riches and cash that you ever covet!!!


Best vastu remedies for money


 Fish aquariums are very positive for wealth. Choose some active and healthy fish and try to make sure that they are strong swimmers. Keep the water dirt free and aerated. The constant movement of fish will keep the energy of wealth on the move.

 If the entrance to your apartment lies at the end of a long corridor, the energy flowing towards it will be too fierce, increasing risk to your financial investments. Its effect can be diluted by keeping a plant halfway down the corridor.

 Make your front door distinctive to attract wealth within. Color it different from the neighboring walls.

 Keep the windows clean and sparkling, as dirty glass restricts the flow of money.

 Place decorative boulders or curved pathways or pebbles around your building. This will increase the movement of financial energy in a business that is suffering from setbacks.

 If your expenses are spiraling beyond control, keep live plants or grains in the toilet. It will prevent the money from going down the drain, because, symbolically, growing things reabsorb water energy and recycle it.

 Keep a mirror to reflect your cash box or locker. It, symbolically, doubles your wealth and opportunities.

 Keep a birdbath or feeder in the yard to attract wild life, as it augments the amount of energy around your home. Birdbaths and bird feeders can be of great help in cleaning up your finances and drawing prosperity from all directions.

 The almirah in which jewelry, valuables and important papers are kept should be positioned very carefully, according to Vastu. The ideal location is at the west-side wall, facing the east, or a southwest corner facing the east or the north. Locating the almirah at the south wall facing the north also brings good fortune. It should be preferably open to the north, which is the direction of Kuber, the God of wealth.

 Purple is the color which represents wealth. Keeping a purple-colored plant in the southeast corner would be beneficial. Else, a money plant could be grown in a purple colored pot and placed in the southeast corner of the office or drawing room of the house.

 Drainage pipes should be fitted in the east or the north area of factories, offices or residences

घर के वास्तुदोष को दूर करने के उपाय वास्तुदोष और उसके परिणाम

September 10, 2018
घर के वास्तुदोष को दूर करने के उपाय वास्तुदोष और उसके परिणाम


घर के वास्तुदोष को दूर करने के उपाय लगभग हर घर में वास्तु दोष का प्रभाव रहता है। कहीं ज्यादा और कहीं कम। अपने जीवन की जमा पूंजी को खर्च करके भवन का निर्माण करवाया जाता है और यदि उसमें वास्तु दोष का प्रभाव दिखलाई पड़ने लगे तो क्या हम उस भवन को तोड़कर फिर से निर्माण करवायें। शायद ऐसा सम्भव नहीं है। जानिये घर में वास्तु दोष के लक्षण घबराइये मत आइये हम आपको बताते है बिना तोड़-फोड़ किये वास्तु दोष को दूर करने के उपाय.. * यदि घर की खिड़की से पड़ोसी के घर का बगीचा, धोबीघाट, वाशिंग मशीन में कपड़े सूखते हुए दिखाई दें।यदि यह दूरी खिड़की से 30 मी0 से 100मी0 के भीतर हो तथा स्त्रियों के अन्तःवस्त्र सूखते हुए दिखाई दें, तो यह स्थिति अशुभ मानी जाती है। ऐसे घर में गृहस्वामी की आर्थिक स्थिति हमेशा कमजोर बनी रहती है तथा परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम न के बराबर ही रहता है। उपाय - खिड़की के दोनों ओर पर्दे लगाने से शुभ फल मिलने लगता है। * यदि मकान की मुख्य खिड़की या दरवाजे के सामने सेटेलाइट अथवा डिश का एन्टिना लगा हो तो, इस घर में बच्चों की पढ़ाई में अक्सर बाधायें आती रहती है। बच्चों का स्वास्थ्य भी उत्तम नहीं रहता है। घर की महिलायें चिड़चिड़े स्वभाव की हो जाती है। उपाय- मुख्य दरवाजे पर जाली या परदे लगायें। खिड़की के बाहरी हिस्से पर गमलों में पौधे लगाना भी लाभकारी रहता है। * मकान के पीछे यदि राजमार्ग, रोड हो तो, समझे कि कोई आप पर पीछे से वार कर रहा है। यह स्थिति भी वास्तु के अनुसार शुभ नहीं होती है। इस घर में रहने वाले व्यक्तियों के साथ अधिकतर अपने लोग ही विश्वासघात या धोखा करते है। घर के मुखिया के लोग बुराई भी करते-रहते है एंव घर की उन्नति तथा तरक्की के मार्ग में अवरोध उत्पन्न होते है। उपाय-मकान की पिछली दीवार पर अष्टकोणीय दर्पण लगायें तथा पीछे वाली दीवार को अधिक ऊंचा करने से शुभफल मिलने लगता है।

दक्षिण नैॠत्य द्वार - घर की स्त्री को हानि

उत्तर- ईशान का द्वार - पूर्ण सुख व उन्नति का आधार

पश्चिम का द्वार - सुख व कुशलता का द्वार

पूर्व का द्वार -शुभता की मुख्य भेंट

उत्तर में द्वार बनायो - सुख को भी मार्ग दिखाओ

पूर्व की ऊँची दीवार - स्वास्थ्य सदा रहे खराब

पश्चिम में टेडी दीवार - अनिष्ट की लगे कतार

ईशान कमरे का पूर्वद्वार - सुख सम्पति अपार

ईशान कमरे का उत्तर द्वार - बरसे धन बारम्बार अपार

पूर्व पश्चिम सीढ़ी हो - जग में राजा समान जियो

पूर्व को अलमारी होना - अपनी सारी सम्पति खोना.

दक्षिण में रखी अलमारी - दौलत आने की बारी

पश्चिम में हो जब आँगन - पूर्व में भी अवश्य हो आँगन

दक्षिण की ऊँची दीवार - घर में सुख रहे अपार

पश्चिम का नाला - सुख सम्पति हरने वाला
 
पूर्व का स्नानघर - सुख सम्पति भरे अपार

बच्चे जब उत्तर में सोयें -आशाओं के दीप जलाएं

दम्पति ईशान में सोयें -विकलांग बच्चा अवश्य पायें

उत्तर सर कर नहीं सोना -स्वास्थ्य नहीं है खोना

सेप्टिक टैंक दक्षिण में -जीवन हो संकट में

घर के ईशान में अलमारी -दरिद्र से भर लो घर भारी

दक्षिण का उच्च चबूतरा -दौलत से आये हजारों जेवर
 
पूर्व का उच्च चबूतरा -पुरुष हमेशा खाए फटकार

मुख्यद्वार पर माँ दुर्गा विराजे -घर को उपरी हवा सदा त्यागे

दम्पति ईशान में सोना - विकलांग संतान होना

उत्तर सर करके नही सोना - स्वास्थ्य नहीं है खोना .

पश्चिम में सेप्टिंक टैंक होना-घर में रोगों का होना

पश्चिम में तुलसी लगाओ -महिला का स्वास्थ्य बनाओ

बाथरूम में खुला नमक रखो -बीमारी को दूर भगाओ

सीडी मुड़े बाएँ से दायें -भाग्य भी चढ़े आसानी से

मुख्य द्वार के सामने हो कोई कोना -घर में सुख न होना

वास्तु दोष निवारक पौधे

September 10, 2018
वास्तु दोष निवारक पौधे

हमारे ऋषि-मुनियों ने अनेक ऎसे वृक्षों को घर में लगाने की सलाह दी है, जिनसे वास्तुदोष का निवारण हो सकता है। साथ ही पेड़-पौधे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मददगार हैं। वास्तुशास्त्र के ग्रंथों में अनेक ऎसे वृक्षों का उल्लेख किया गया है, जो धार्मिक दृष्टि से महžवपूर्ण होने के साथ-साथ दोष निवारण में भी सहायक हैं, इनमें से कुछ हैं-

अशोक : अशोक के वृक्ष को हिन्दू धर्मावलंबी शुभ वृक्ष मानते हैं। इसे घर में लगाने से अशुभ दोष समाप्त हो जाते हैं।

केला: घर की चारदीवारी में केले का वृक्ष लगाना शुभ है। इसे ईशान कोण में लगाना शुभ है। क्योंकि यह बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि वृक्ष है। केले के समीप यदि तुलसी का पेड़ भी लगा लें, तो शुभकारी रहेगा।

अश्वगंधा : यह पेड़ स्वत: ही उगता है। यह वृक्ष वास्तु दोष समाप्त करने की क्षमता रखता है।

नारियल: नारियल का वृक्ष घर में लगाना फलदायी है। जिस घर में नारियल का वृक्ष होता है, वहां रहने वाले के मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

तुलसी : यह जीवनदायिनी और लक्ष्मी स्वरू पा है। इसे प्रत्येक हिन्दू घर में लगाते हैं। लोग इसकी श्रद्धापूर्वक पूजा भी करते हैं। इसे घर के भीतर रखने से अशुभ ऊर्जा नष्ट होती है। घर का वातावरण भी पवित्र व शुद्ध बनता है।

अनार: यह पौधा भी शुभ है, परंतु इसे आग्नेय या नैऋत्य कोण में नहीं लगाएं।

बरगद: यह वृक्ष पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना गया है। वास्तु की दृष्टि से भी यह महžवपूर्ण वृक्ष है। इसे पश्चिम दिशा में नहीं लगाएं।

आंवला: आंवले का वृक्ष घर में लगाना शुभ माना गया है। इसे पूर्व व उत्तर में लगाएं। इसकी नित्य पूजा करना भी फलदायी है।

नीम: घर के वायव्य कोण में नीम का वृक्ष होना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इसका रोपण करना कल्याणकारी तथा मोक्षदायक माना जाता है।

बिल्व: भगवान शिव को बिल्व का वृक्ष अत्यंत प्रिय है। इसको लगाने से धन संपदा की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती है। इसकी पूजा करें व इसके पत्ते शिवलिंग पर चढ़ाएं।

शतावर: वास्तुनुसार यह एक बेल है। इसे घर में इस तरह लगाएं कि यह ऊपर की ओर चढ़े।

हर रंग कुछ कहता है रंगों का हमारे जीवन पर प्रभाव

September 10, 2018
हर रंग कुछ कहता है रंगों का हमारे जीवन पर प्रभाव
इंद्रधनुषी रंगों से सजी दीवारें हमारे घर की खूबसूरती को बढ़ाने के साथ-साथ हमारे दिल को भी सुकून देती हैं। हर रंग का हमारी सोच पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कुछ रंग हम पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं तो कुछ नकारात्मक। 

जहाँ सफेद रंग हमें शांति का अहसास देता है तो वहीं हरा रंग खुशहाली का। दीवारों पर रंगों के बदलने के साथ ही हमारा जीवन किस तरह से प्रभावित होता है। यह जानने के लिए अपने आशियाने की दीवारों को रंगवाने से पहले उन रंगों के हम पर पड़ने वाले प्रभावों पर एक नजर-  

1) पीला रंग:- यह रंग हमें गर्माहट का अहसास देता है। इस रंग से कमरे का आकार पहले से थोड़ा बड़ा लगता है तथा कमरे में रोशनी की भी जरूरत कम पड़ती है। अत: जिस कमरे में सूर्य की रोशनी कम आती हो, वहाँ दीवारों पर हमें पीले रंग का प्रयोग करना चाहिए। 

2) गुलाबी रंग:- यह रंग हमें सुकून देता है तथा परिवारजनों में आत्मीयता बढ़ाता है। बेडरूम के लिए यह रंग बहुत ही अच्छा है। 

3) नीला रंग:- यह रंग शांति और सुकून का परिचायक है। यह रंग घर में आरामदायक माहौल पैदा करता है। यह रंग डिप्रेशन को दूर करने में भी मदद करता है। 

4) जामुनी रंग:- यह रंग धर्म और अध्यात्म का प्रतीक है। इसका हल्का शेड मन में ताजगी और अद्‍भुत अहसास जगाता है। बेहतर होगा यदि हम इसके हल्के शेड का ही दीवारों पर प्रयोग करें। 

5) नारंगी रंग:- यह रंग लाल और पीले रंग के समन्वय से बनता है। यह रंग हमारे मन में भावनाओं और ऊर्जा का संचार करता है। इस रंग के प्रभाव से जगह थोड़ी सँकरी लगती है परंतु यह रंग हमारे घर को एक पांरपरिक लुक देता है। 

इस प्रकार रंगों का हमारे जीवन व स्वास्थ्य पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। घर की दीवारों पर रंगों का उचित संयोजन करके अपने जीवन को

शरीर के इन अंगों पर तिल का निशान व्यक्ति को बनाता है धनवान | तिल का रहस्य |शरीर पर तिल का फल ||

September 10, 2018
शरीर के इन अंगों पर तिल का निशान व्यक्ति को बनाता है धनवान | तिल का रहस्य |शरीर पर तिल का फल ||

चेहरे पर तिल का प्रभाव

 

  1. यदि चेहरे पर दाहिने भाग में लाल या काले रंग का तिल हो, तो व्यक्ति यशस्वी, धनवान तथा सुखी होता हैं।
  2. यदि नीचे के होठ पर तिल का चिन्ह हो, तो ऐसा व्यक्ति निर्धन होता हैं तथा जीवन भर गरीबी में दिन व्यतीत करता हैं। होठ और तिल के बिच जितनि दूरी हो प्रभाव उतना कम होता जाता हैं।
  3. यदि ऊपर के होंठ पर तिल का चिन्ह हो, तो ऐसा व्यक्ति अत्यधिक विलासी और काम पिपासु लेकिन धनवान होता हैं।
  4. यदि बायें कान के ऊपरी सिरे पर तिल का चिन्ह हो, तो व्यक्ति दीर्घायु होता हैं लेकिन उसका शरीर थोडा कमजोर होता हैं।
  5. यदि नासिका के मध्य भाग में तिल हो, तो व्यक्ति अधिक यात्रा करने वाला भ्रमण प्रिय एवं दुष्ट स्वभाव का होता हैं।
  6. यदि दाहिनी कनपटी पर तिल हो, तो व्यक्ति प्रेमी, समृद्ध तथा सुखपूर्ण अपना जीवन व्यतीत करने वाला होता हैं।
  7. यदि बायें गाल पर तिल का चिन्ह हो, तो गृहस्थ जीवन सुखमय रहता हैं लेकिन जीवन में धन का अभाव रहता हैं।
  8. यदि ठोड़ी पर तिल हो, तो वह व्यक्ति थोडा स्वार्थी एवं अपने काम में ही लगा रहने वाला होता हैं।
  9. यदि दाहिने कान के पास तिल हो, तो व्यक्ति साहसी होते हैं।
  10. यदि दाहिनी और भौंह के पास में तिल हो, तो व्यक्ति कि आंखें कमजोर होती हैं।
  11. यदि दाहिने गाल पर तिल का चिन्ह हो, तो ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान तथा जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति करने वाला होता है।
  12. यदि गर्दन पर तिल हो, तो व्यक्ति बुद्धिमान होते हैं और अपने प्रयत्नों से धन संचय करने वाला होता हैं।
  13. यदि दाहिनी आंख के नीचले हिस्से पर तिल का चिन्ह हो, तो वे समृद्ध तथा सुखी होते हैं।
  14. यदि नासिका के बाएं भाग पर तिल हो, तो व्यक्ति अधिक प्रयत्न करने के बाद सफलता प्राप्त होती है।
  15. यदि बाएं आंख की भौंहों के पास में तिल हो, तो व्यक्ति एकान्त प्रिय एवं सामान्य जीवन निर्वाह करने वाला होता है।
  16. यदि दोनों भौंहों के बीच के हिस्से में तिल का चिन्ह हो, तो व्यक्ति दीर्घायु धार्मिक एवं उदार हृदय के स्वामी होते हैं।
  17. यदि ललाट के मध्य भाग में तिल निर्मल प्रेम की निशानी है। ललाट के दाहिने तरफ का तिल किसी विषय विशेष में निपुणता, किंतु बायीं तरफ का तिल फिजूलखर्ची का प्रतीक होता है। ललाट या माथे के तिल के संबंध में एक मत यह भी है कि दायीं ओर का तिल धन वृद्धिकारक और बायीं तरफ का तिल घोर निराशापूर्ण जीवन का सूचक होता है।
  18.  यदि दोनों भौहों पर तिल हो तो जातक अकसर यात्रा करता रहता है। दाहिनी पर तिल सुखमय और बायीं पर तिल दुखमय दांपत्य जीवन का संकेत देता है।
  19. दायीं आंख की पुतली पर तिल हो तो व्यक्ति के विचार उच्च होते हैं। बायीं पुतली पर तिल वालों के विचार कुत्सित होते हैं। पुतली पर तिल वाले लोग सामान्यत: भावुक होते हैं।
  20.  आंख की पलकों पर तिल हो तो जातक संवेदनशील होता है। दायीं पलक पर तिल वाले बायीं वालों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होते हैं।
  21.  दायीं आंख पर तिल स्त्री से मेल होने का एवं बायीं आंख पर तिल स्त्री से अनबन होने का आभास देता है।
  22.  कान पर तिल व्यक्ति के अल्पायु होने का संकेत देता है।
  23.  नाक पर तिल हो तो व्यक्ति प्रतिभासंपन्न और सुखी होता है। महिलाओं की नाक पर तिल उनके सौभाग्यशाली होने का सूचक है।
  24. होंठ पर तिल वाले व्यक्ति बहुत प्रेमी हृदय होते हैं। यदि तिल होंठ के नीचे हो तो गरीबी छाई रहती है।
  25. मुखमंडल के आसपास का तिल स्त्री तथा पुरुष दोनों के सुखी संपन्न एवं सज्जन होने के सूचक होते हैं। मुंह पर तिल व्यक्ति को भाग्य का धनी बनाता है। उसका जीवनसाथी सज्जन होता है।
  26. गाल पर लाल तिल शुभ फल देता है। बाएं गाल पर कृष्ण वर्ण तिल व्यक्ति को निर्धन, किंतु दाएं गाल पर धनी बनाता है।
  27. जबड़े पर तिल हो तो स्वास्थ्य की अनुकूलता और प्रतिकूलता निरंतर बनी रहती है।
  28.  जिस स्त्री की ठोड़ी पर तिल होता है, उसमें मिलनसारिता की कमी होती है।
  29. दाएं कंधे पर तिल का होना दृढ़ता तथा बाएं कंधे पर तिल का होना तुनकमिजाजी का सूचक होता है।
  30. दाहिनी भुजा पर तिल वाला जातक प्रतिष्ठित व बुद्धिमान होता है। लोग उसका आदर करते हैं।
  31. बायीं भुजा पर तिल हो तो व्यक्ति झगड़ालू होता है। उसका सर्वत्र निरादर होता है। उसकी बुद्धि कुत्सित होती है।
  32. कोहनी पर तिल का पाया जाना विद्वता का सूचक है।
  33. जिसके हाथों पर तिल होते हैं वह चालाक होता है। गुरु क्षेत्र में तिल हो तो सन्मार्गी होता है। दायीं हथेली पर तिल हो तो बलवान और दायीं हथेली के पृष्ठ भाग में हो तो धनवान होता है। बायीं हथेली पर तिल हो तो जातक खर्चीला तथा बायीं हथेली के पृष्ठ भाग पर तिल हो तो कंजूस होता है।
  34. अंगूठे पर तिल हो तो व्यक्ति कार्यकुशल, व्यवहार कुशल तथा न्यायप्रिय होता है।
  35. जिसकी तर्जनी पर तिल हो, वह विद्यावान, गुणवान और धनवान किंतु शत्रुओं से पीड़ित होता है।
  36. मध्यमा पर तिल उत्तम फलदायी होता है। व्यक्ति सुखी होता है। उसका जीवन शांतिपूर्ण होता है।
  37. जिसकी अनामिका पर तिल हो तो वह ज्ञानी, यशस्वी, धनी और पराक्रमी होता है।
  38.  कनिष्ठा पर तिल हो तो वह व्यक्ति संपत्तिवान होता है, किंतु उसका जीवन दुखमय होता है।
  39. गले पर तिल वाला जातक आरामतलब होता है। गले पर सामने की ओर तिल हो तो जातक के घर मित्रों का जमावड़ा लगा रहता है। मित्र सच्चे होते हैं। गले के पृष्ठ भाग पर तिल होने पर जातक कर्मठ होता है।
  40. छाती पर दाहिनी ओर तिल का होना शुभ होता है। ऐसी स्त्री पूर्ण अनुरागिनी होती है। पुरुष भाग्यशाली होते हैं। शिथिलता छाई रहती है। छाती पर बायीं ओर तिल रहने से भार्या पक्ष की ओर से असहयोग की संभावना बनी रहती है। छाती के मध्य का तिल सुखी जीवन दर्शाता है। यदि किसी स्त्री के हृदय पर तिल हो तो वह सौभाग्यवती होती है।
  41. यदि किसी व्यक्ति की कमर पर तिल होता है तो उस व्यक्ति की जिंदगी सदा परेशानियों से घिरी रहती है।
  42. पीठ पर तिल हो तो जातक भौतिकवादी, महत्वाकांक्षी एवं रोमांटिक हो सकता है। वह भ्रमणशील भी हो सकता है। ऐसे लोग धनोपार्जन भी खूब करते हैं और खर्च भी खुलकर करते हैं। वायु तत्व के होने के कारण ये धन संचय नहीं कर पाते।
  43. पेट पर तिल हो तो व्यक्ति चटोरा होता है। ऐसा व्यक्ति भोजन का शौकीन व मिष्ठान्न प्रेमी होता है। उसे दूसरों को खिलाने की इच्छा कम रहती है।
  44. दाहिने घुटने पर तिल होने से गृहस्थ जीवन सुखमय और बायें पर होने से दांपत्य जीवन दुखमय होता है।
  45. पैरों पर तिल हो तो जीवन में भटकाव रहता है। ऐसा व्यक्ति यात्राओं का शौकीन होता है। दाएं पैर पर तिल हो तो यात्राएं सोद्देश्य और बाएं पर हो तो निरुद्देश्य होती हैं।

Vastu Tips In Hindi - घर की सुख शान्ति के लिए वास्तु टिप्स - Vastu Tips in Hindi for Peace in Home

September 10, 2018
Vastu Tips In Hindi - घर की सुख शान्ति के लिए वास्तु टिप्स - Vastu Tips in Hindi for Peace in Home

घर में सुख शांति के लिए वास्तु टिप्स | घर में सुख शांति के टोटके | घर की सुख शांति के लिए क्या करें


नया साल हो या कोई त्‍योहार, अधिकांश बधाई संदेशों में आपके चाहने वाले आपके जीवन में सुख शांति एवं समृद्धि की कामनाएं भेजते हैं। समृद्धि तो आपकी मेहनत पर निर्भर करती है, लेकिन सुख और शांति के लिए आप क्‍या कर सकते हैं। सुख और शांति के लिए जितना ज्‍यादा आपका व्‍यवहार मायने रखता है, उससे कहीं ज्‍यादा आपके घर का वास्‍तु।

मकान को घर बनाने के लिए जरूरी है, परिवार में सुख-शांति का बना रहना। और ऐसा होने पर ही आपको सुकून मिलता है। यदि आप घर बनवाने जा रहे हैं, तो वास्‍तु के आधार पर ही नक्‍शे का चयन करें। अपने आर्किटेक्‍ट से साफ कह दें, कि आपको वास्‍तु के हिसाब से बना मकान ही चाहिए। हां यदि आप बना-बनाया मकान या फ्लैट खरीदने जा रहे हैं, तो वास्‍तु संबंधित निम्‍न बातों का ध्‍यान रख कर अपने लिए सुंदर मकान तलाश सकते हैं। 

1. मकान का मुख्‍य द्वार दक्षिण मुखी नहीं होना चाहिए। इसके लिए आप चुंबकीय कंपास लेकर जाएं। यदि आपके पास अन्‍य विकल्‍प नहीं हैं, तो द्वार के ठीक सामने बड़ा सा दर्पण लगाएं, ताकि नकारात्‍मक ऊर्जा द्वार से ही वापस लौट जाएं।

2. घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक या ऊँ की आकृति लगाएं। इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

3. घर की पूर्वोत्‍तर दिशा में पानी का कलश रखें। इससे घर में समृद्धि आती है।

4. घर के खिड़की दरवाजे इस प्रकार होनी चाहिए, कि सूर्य का प्रकाश ज्‍यादा से ज्‍यादा समय के लिए घर के अंदर आए। इससे घर की बीमारियां दूर भागती हैं।

5. परिवार में लड़ाई-झगड़ों से बचने के लिए ड्रॉइंग रूम यानी बैठक में फूलों का गुलदस्‍ता लगाएं।

6. रसोई घर में पूजा की अल्‍मारी या मंदिर नहीं रखना चाहिए।

7. बेडरूम में भगवान के कैलेंडर या तस्‍वीरें या फिर धार्मिक आस्‍था से जुड़ी वस्‍तुएं नहीं रखनी चाहिए। बेडरूम की दीवारों पर पोस्‍टर या तस्‍वीरें नहीं लगाएं तो अच्‍छा है। हां अगर आपका बहुत मन है, तो प्राकृतिक सौंदर्य दर्शाने वाली तस्‍वीर लगाएं। इससे मन को शांति मिलती है, पति-पत्‍नी में झगड़े नहीं होते।

8. घर में शौचालय के बगल में देवस्‍थान नहीं होना चाहिए।

9. घर में घुसते ही शौचालय नहीं होना चाहिए।

10. घर के मुखिया का बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में अच्‍छा माना जाता है

Bedroom kis disha main banaye | बेडरूम का निर्माण किस दिशा में करें | Bedroom vastu

September 10, 2018
Bedroom kis disha main banaye | बेडरूम का निर्माण किस दिशा में करें | Bedroom vastu

वास्‍तु के अनुसार सजायें अपना बेडरूम

 
पति-पत्‍नी के रिश्‍तों पर बेडरूम का भी काफी प्रभाव होता है। जी हां आप मानें या नहीं, वास्‍तु के मुताबिक बेडरूम की साज सज्‍जा ही पति-पत्‍नी के बीच के रिश्‍तों की मुधरता तय करती है। चलिये बात अगर बेडरूम की आ ही गई है, तो उसकी साज सज्‍जा पर भी गौर कर ही लेते हैं। यहां हम आपको 10 टिप्‍स देंगे वास्‍तु के नियमों के मुताबिक बेडरूम को कैसे सजाएं।

हम जब किसी अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदते हैं, तो चाह कर भी वास्‍तु के सारे नियमों के मुताबिक नहीं चल पाते। क्‍योंकि बिल्‍डर अपने मुताबिक बिल्डिंग बनाते हैं, आपके नहीं। तो ऐसे में अगर आप उसी बने हुए रूम को अपने तरीके से सजाएं वो भी वास्‍तु के मुताबिक, तो आपके जीवन में खुशियां हमेशा बनी रहेंगी। यदि आपका बेडरूम अच्‍छा है, तो घर में मानसिक शांति बनी रहेगी और आपकी सेक्‍सुअल लाइफ भी बेहतरीन रहेगी। प्रस्‍तुत हैं 10 टिप्‍स वास्‍तु की-

1. बेडरूम किसी प्रकार की चर्चा व बहस करने के लिए नहीं होता। यह सिर्फ आराम करने व सोने और लाइफ पार्टनर के साथ मस्‍ती करने के लिए होता है। बेडरूम में प्‍यार के अलावा अन्‍य बातें नहीं करनी चाहिये।

2. बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और इसी कोने में बेड भी रखना चाहिये। यदि आपने अपना बेड कमरे के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखा तो आपको ठीक से नींद नहीं आयेगी, आप तनाव से घिरे रहेंगे, आपको गुस्‍सा जल्‍दी आयेगा और बेचैनी सी बनी रहेगी।

3. बेडरूम की बाहरी दीवारों पर टूट-फूट या दरार नहीं होनी चाहिये। इससे घर में परेशानियां आती हैं।

4. यह वो रूम होता है, जहां आप दिन भर के सात से 10 घंटे तक बिताते हैं, यानी इसके वास्‍तु का सीधा प्रभाव आपके जीवन पर पड़ता है।

5. मकान के मालिक अगर उत्‍तर-पश्चिम दिशा में स्थित बेडरूम में सेते हैं, तो अस्थिरता बनी रहती है, लिहाजा इस दिशा में घर के मालिक का बेडरूम नहीं होना चाहिए। घर के अन्‍य सदस्‍यों का बेडरूम यहां हो सकता है।

5. घर के मालिक का बेडयम दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए, यदि किसी कारणवश नहीं है, तो दूसरा विकल्‍प दक्षिण या पश्चिम में हो सकता है।

6. बेड का सिरहाना दक्षिण की ओर होना चाहिये। इससे बेचैनी नहीं रहती है और रात में अच्‍छी नींद आती है उसका स्‍वास्‍थ्‍य उत्‍तम रहता है। उत्‍तर की तरफ सिर करके सोने से खराब सपने आते हैं और नींद अच्‍छी नहीं आती और स्‍वास्‍थ्‍य खराब रहता है। वहीं पूर्व की ओर सिर करने से ज्ञान बढ़ता है, जबकि पश्चिम की ओर सिर करके सोने से स्‍वास्‍थ्‍य खराब रहता है।

7. बेडरूम में कोई ऐसी तस्‍वीर मत लगायें, जो हिंसा दर्शा रही हो। बेडरूम की दीवार

Vastu effect of amala in house : घर के वास्‍तु में आंवले का महत्‍व | नहीं होती है धन की कमी घर में आंवले का पेड़ लगाने से |

September 10, 2018
Vastu effect of amala in house : घर के वास्‍तु में आंवले का महत्‍व | नहीं होती है धन की कमी घर में आंवले का पेड़ लगाने से  |

Vastu: How to Remove Negative Energy from Amla : आंवले से घर के वास्तु दोष दूर करें 

 

प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि मुनियों ने आवला को औषधीय रूप में प्रयोग किया परन्तु आंवले का धार्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। जो निम्न प्रकार से है-

1- यदि कोई आंवले का एक वृक्ष लगाता है तो उस व्यक्ति को एक राजसूय यज्ञ के बराबर फल मिलता है।
2- यदि कोई महिला शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजन करती है तो वह जीवन पर्यन्त सौभाग्यशाली बनी रहती है।
3- अक्षय नवमी के दिन जो भी व्यक्ति आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करता है, उसकी प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है एंव दीर्घायु लाभ मिलता है।
4- आंवले के वृक्ष के नीचे ब्राहमणों को मीठा भोजन कराकर दान दिया जाय तो उस जातक की अनेक समस्यायें दूर होती तथा कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

आंवले का ग्रहों से सम्बन्ध

आंवले का ज्योतिष में बुध ग्रह की पीड़ा शान्ति कराने के लिये एक स्नान कराया जाता है। जिस व्यक्ति का बुध ग्रह पीडि़त हो उसे शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को स्नान जल में- आंवला, शहद, गोरोचन, स्वर्ण, हरड़, बहेड़ा, गोमय एंव अक्षत डालकर निरन्तर 15 बुधवार तक स्नान करना चाहिए जिससे उस जातक का बुध ग्रह शुभ फल देने लगता है। इन सभी चीजों को एक कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। उपरोक्त सामग्री की मात्रा दो-दो चम्मच पर्याप्त है। पोटली को स्नान करने वाले जल में 10 मिनट के लिये रखें। एक पोटली 7 दिनों तक प्रयोग कर सकते है।

जिन जातकों का शुक्र ग्रह पीडि़त होकर उन्हे अशुभ फल दे रहा है। वे लोग शुक्र के अशुभ फल से बचाव हेतु शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को हरड़, इलायची, बहेड़ा, आंवला, केसर, मेनसिल और एक सफेद फूल युक्त जल से स्नान करें तो लाभ मिलेगा। इन सभी पदार्थों को एक कपड़े में बाधकर पोटली बना लें। उपरोक्त सामग्री की मात्रा दो-दो चम्मच पर्याप्त रहेगी। पोटली को स्नान के जल में 10 मिनट के लिये रखें। एक पोटली को एक सप्ताह तक प्रयोग में ला सकते है। 

आंवला और वास्तु

आंवले का वृक्ष घर में लगाना वास्तु की दृष्टि से शुभ माना जाता है। पूर्व की दिशा में बड़े वृक्षों को नहीं लगाना चाहिए परन्तु आंवले को इस दिशा में लगाने से सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता है।

इस वृक्ष को घर की उत्तर दिशा में भी लगाया जा सकता है। जिन बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है या फिर स्मरण शक्ति कमजोर है, उनकी पढ़ने वाली पुस्तकों में आंवले व इमली की हरी पत्तियों को पीले कपड़े में बांधकर रख दें।

आंवला और रोग

पीलिया रोग में एक चम्मच आंवले के पाउडर में दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार सेंवन करने से लाभ मिलता है। जिन लागों की नेत्र ज्योति कम है वे लोग एक चम्मच आंवले के चूर्ण में दो चम्मच शहद अथवा शुद्ध देशी घी मिलाकर दिन में दो बार सेंवन करने से नेत्र ज्योति में बढ़ती है एंव इन्द्रियों को शक्ति प्रदान होती है।

गठिया रोग वाले जातक 20 ग्राम आंवले का चूर्ण तथा 25 ग्राम गुड़ लेकर 500 मिलीलीटर जल में डालकर पकायें। जब जल आधा रह जाये तब इसे छानकर ठण्डा कर लें। इस काढ़े को दिन में दो बार सेंवन करें। जबतक सेंवन करें तबतक नमक का सेंवन बन्द कर दें अथवा बहुत कम कर दें।

मकान बनवाते वक्‍त वास्‍तु नियम क्‍यों जरूरी? Vastu Shastra

September 10, 2018
मकान बनवाते वक्‍त वास्‍तु नियम क्‍यों जरूरी? Vastu Shastra


मानव शरीर और ब्रम्हाण्ड पंचतत्वों से बना हुआ है, भवन भी पांच तत्वों का ही सम्मिश्रित स्वरूप है। ब्रम्हाण्ड, मानव शरीर, एंव भवन इन तीनों में स्थित पांच तत्वों का सामंजस्य स्थापित करके खुशहाल जीवन व्यतीत किया जा सकता है।

सूर्यः पूर्व दिशा के स्वामी एंव अग्नि तत्व के कारक है। ये पिता के भी कारक माने जाते हैं। कुदरती कुण्डली में सिंह राशि पंचम भाव का प्रतिनिधित्व करती है, इस कारण हाजमे पर विशेष प्रभाव पड़ता है। भवन में पूर्व की दिशा का ऊंचा होना या वहां पर दो छत्ती का निर्माण होने से महिलाओं को हड्डी रोग तथा सरकारी कर्मचारियों को आये दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य और सम्मानित जीवन जीने के लिये भवन पर इसका शुभ प्रभाव पड़ना जरूरी है।

चन्द्रः यह जल तत्व का कारक तथा भवन में इनका ईशान कोण (पूर्व-उत्तर), पर विशेष प्रभाव रहता है। सन्तुलित विचार धारा व शुभता बनायें रखनें में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यह माता का भी प्रतिनिधित्व करते है। इनका कार्य मुख्य रूप से जल संग्रह का है। इनके सन्तुलित होने से जातक को भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति आसानी से होती है तथा मन की चंचलता खत्म होती है। भवन के ईशान कोण में इनकों स्थापित करना शुभ माना जाता है।

मंगलः यह अग्नि तत्व के कारक है तथा भवन में दक्षिण दिशा पर इनका विशेष प्रभाव रसोई घर के रूप में होता है, इस कारण रसोई घर के नजदीक, पूजाघर, शौचालय, बाथरूम तथा स्टोर रूम इन तीनों का एक साथ होना किसी बड़े खतरे की सूचना देता है। यह स्थान दूषित होने पर घर के मुखिया को हार्ट अटैक होने की आशंका रहती है। फोर्स व मीडिया से जुड़े लोगो को आये दिन समस्याओं से जूझना पड़ता है। आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में रसोई घर स्थापित करने से मंगल का अमंगलकारी प्रभाव नही पड़ता है। 

बुधः यह ग्रह पृथ्वी तत्व का द्योतक है, तथा उत्तर दिशा जो सकारात्मक उर्जा का प्रवाह करती है, इस पर इनका विशेष प्रभाव रहता है। युवा तथा गणितज्ञ होने के कारण इनका छात्रों की शिक्षा एंव बैठक रूम में अधिकार क्षेत्र है, इसलिये इन्हे भी शौचालय, रसोई घर, कबाड़ घर आदि से दूर रखना चाहिये अन्यथा बच्चों की शिक्षा में बाधा एंव परिवार में कलह बनी रहती है।

गुरु: ये आकाश तत्व के कारक है तथा ईशान कोण का प्रतिनिधित्व करते है। भवन की जिस दिशा में पूजन गृह बनेगा वह स्थान इनका अधिकार क्षेत्र हो जायेगा। अतः पूजन गृह ईशान कोण में ही स्थापित करें। यह स्थान दूषित होने से- बुर्जुगों से मतभेद, ससुराल पक्ष से तनाव, आर्थिक तंगी, तथा परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद बना रहेगा।

शुक्रः ये चुम्बकत्व आकर्षण का प्रतीक है, तथा आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) के स्वामी है। शुक्र ग्रह आसुरों के देवता है, इनका सौन्दर्य तथा भोग विलास की वस्तुओं पर निवास स्थल है। इस स्थान के दूषित होने से शैया सुख में कमी, विदेश यात्रा में बाधायें, महिलाओं के स्वास्थ्य पर धन अधिक व्यय एंव सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी आयेगी।

शनिः ये वायु तत्व के कारक है, तथा पश्चिम दिशा पर इनका विशेष प्रभाव रहता है। ये न्याय एंव अनुशासन प्रिय है जिस परिवार में अन्याय, अनुशासन, गंदगी, मदिरा का सेवन, झूठ आदि होगा वहां के सदस्यों को आये दिन कष्ट बना रहेगा। घर की जिस दिशा में बेसमेन्ट, कूड़ा, अंधेरा, कबाड़ आदि होगा उस स्थान पर इनका स्थाई निवास स्थान माना गया है। पश्चिम दिशा के दूषित होने से- स्थान परिवर्तन, यात्रा में दुर्घटना, दाम्पत्य सुख में कमी, नौकरों का भाग जाना, घर में चोरी जैसी समस्यायें बनी रहेगी।

राहु एंव केतुः ये दोनो ग्रह नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) दिशा के कारक होते है। सीढि़यों पर तथा लम्बी गलियों में इनका विशेष प्रभाव रहता है। ये एनर्जी कारक ग्रह है, कुदरती कुण्डली में अष्टम भाव में वृश्चिक राशि पर विशेष प्रभाव रहता है। इस स्थान के दूषित होने से- दुर्घटना, आत्महत्या, पाइल्स रोग, खून की कमी तथा महिलाओं को गर्भपात की समस्या रहती है। 

भवन का निर्माण करते समय इन सभी ग्रहों को सही दिशा में स्थापित करके सकारात्मक उर्जा को प्राप्त किया जा सकता है।

Powerful Vastu Science for Money , Wealth & Prosperity in The House

September 10, 2018
Powerful Vastu Science for Money , Wealth & Prosperity in The House


In the term Vastu is a Sanskrit word which means "Bhu" or the Earth and is the underlying stratum of existence.As per a Vedic Hymn "Vastu reva Vastu", all material forms of the Universe are all energies.Vaasthu sastra states that every energy has life and nothing in universe is left out without any vibration.Every material in the Universe radiates some energy at its own specific frequencies. This energy may be positive or negative. Positive energy is beneficial and negative is harmful. Vastu shastra aims at maximising the generation and accumulation of positive energy around the humans and minimise the negative energy

Vastu is the investigation of course that consolidates all the five components of nature and offset them with the man and the material. Vastu Shastra is making a friendly settings or a spot to live or work, in most logical way taking focal points of the advantages offered by the five components called "Paanchbhootas" of the nature in this way preparing for improved wellbeing, riches, success and joy in an illuminated situation.

The world embodies five fundamental components, otherwise called the Paanchbhootas. They are Earth, Water, Air, Fire and Space. Out of the nine planets, our planet has life in light of the vicinity of these five components.

The Directions

The significance of introduction of a building is for sparing vitality as well as to have a superior house outline, which gives open to living as well as gives great wellbeing, success and riches to the house proprietors/occupiers and these families. There lies a co-connection between the rotational situation of Directionsthe planets and the house outline and their distinctive bearings with deference of NORTH. The building of any sort and its development meets the reason if legitimate introduction has been given utilizing suitable neighborhood building material. It increments its life compass as well as enhances the state of tenants. There are examples where structures are not arranged by neighborhood introduction were lost or decayed much quicker then the structures having fabricated with legitimate investigations of introduction.

The best possible introduction implies the correct information of all the eight headings. It is a typical information that the heading from where the Sun emerges is known as East and where it sets as West and when one faces the East course, towards one's left is North and towards one's correct is South. The corner where two headings meet clearly is more critical since it joins the strengths radiating from both the bearings. SO in all there are eight headings , North, Northeast, East, Eastsouth, South, Southwest, West, Westnorth. Each course has its own particular centrality and has its own development. The fundamental standards of Vastu Shastra are in light of these eight headings.

Components of Vastu ShastraVastu is fundamental

Vastu frames the fundamentals of every development; one must take after Vastu from the introductory level i.e. from picking a plot to move in the house. Everything ought to be done by rule following Vastu is not simply a word but rather it is a SCIENCE and a scaffold in the middle of man and nature.

Vastu is taken after while picking a plot, how to pick a plot: the shape, the nature of the dirt. At the point when and how to develop a house, how to do the insides, how to pick shading and when to move. Vastu is such a profound science, to the point that it is a pool of data and one can have any questions cleared with legitimate thinking.

Vastu is extraordinary

Vastu is a science that has begun from India. Feng shui is a craft of saddling energies. In spite of the fact that both have a same target, the advantage of humankind however the standards are altogether different. I am a strict supporter of Vastu as it is begun from India and its taking into account our way of life, customs, land conditions, climatical conditions and everything for India. What's more, fengshui is begun in China and in light of their way of life and conventions.
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