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Monday, September 10, 2018

अपने घर में कौन सा पेड़ लगाना शुभ होता है और कौन सा अशुभ, जानिए | वास्तु शास्त्र

September 10, 2018
अपने घर में कौन सा पेड़ लगाना शुभ होता है और कौन सा अशुभ, जानिए | वास्तु शास्त्र

वास्तु बताए घर में कौन-सा पौधा लगाएं



पौधा रोपण हेतु ज्योतिष के अनुसार नक्षत्रों का महत्व है। उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रोहिणी, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, मूल, विशाखा, पुष्य, श्रवण, अश्विनी, हस्त इत्यादि नक्षत्रों में किए गए पौधा रोपण शुभ फलदायी होते हैं। 

वास्तु के अनुसार घर के समीप शुभ वृक्ष :- 
घर के समीप शुभ करने वाले वृक्ष- निम्ब, अशोक, पुन्नाग, शिरीष, बिल्वपत्र, आंकड़ा तथा तुलसी का पौधा आरोग्यवर्धक होता है। 

वास्तु के अनुसार घर के समीप अशुभ वृक्ष :- 
पाकर, गूलर, नीम, बहेड़ा, पीपल, कपित्थ, बेर, निर्गुण्डी, इमली, कदम्ब, बेल, खजूर ये सभी घर के समीप अशुभ हैं।

घर में बेर, केला, अनार, पीपल और नींबू लगाने से घर की वृद्धि नहीं होती। 

घर के पास कांटे वाले, दूध वाले और फल वाले वृक्ष हानिप्रद होते हैं। 

घर की आग्नेय दिशा में पीपल, हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण का अधिक महत्व है। 

शास्त्रों में कहा गया है कि एक पेड़ दस पुत्रों के समान होता है। 

पेड़ लगाने के सुख बहुत होते हैं और पुण्य उससे भी अधिक। 

वृक्षों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने हेतु परिवार के प्रति व्यक्ति को हर अमावस्या पर एक-एक पौधा रोपण अवश्य ही करना चाहिए

 

Bedroom kis disha main banaye | बेडरूम का निर्माण किस दिशा में करें | Bedroom vastu

September 10, 2018
Bedroom kis disha main banaye | बेडरूम का निर्माण किस दिशा में करें | Bedroom vastu

वास्‍तु के अनुसार सजायें अपना बेडरूम

 
पति-पत्‍नी के रिश्‍तों पर बेडरूम का भी काफी प्रभाव होता है। जी हां आप मानें या नहीं, वास्‍तु के मुताबिक बेडरूम की साज सज्‍जा ही पति-पत्‍नी के बीच के रिश्‍तों की मुधरता तय करती है। चलिये बात अगर बेडरूम की आ ही गई है, तो उसकी साज सज्‍जा पर भी गौर कर ही लेते हैं। यहां हम आपको 10 टिप्‍स देंगे वास्‍तु के नियमों के मुताबिक बेडरूम को कैसे सजाएं।

हम जब किसी अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदते हैं, तो चाह कर भी वास्‍तु के सारे नियमों के मुताबिक नहीं चल पाते। क्‍योंकि बिल्‍डर अपने मुताबिक बिल्डिंग बनाते हैं, आपके नहीं। तो ऐसे में अगर आप उसी बने हुए रूम को अपने तरीके से सजाएं वो भी वास्‍तु के मुताबिक, तो आपके जीवन में खुशियां हमेशा बनी रहेंगी। यदि आपका बेडरूम अच्‍छा है, तो घर में मानसिक शांति बनी रहेगी और आपकी सेक्‍सुअल लाइफ भी बेहतरीन रहेगी। प्रस्‍तुत हैं 10 टिप्‍स वास्‍तु की-

1. बेडरूम किसी प्रकार की चर्चा व बहस करने के लिए नहीं होता। यह सिर्फ आराम करने व सोने और लाइफ पार्टनर के साथ मस्‍ती करने के लिए होता है। बेडरूम में प्‍यार के अलावा अन्‍य बातें नहीं करनी चाहिये।

2. बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और इसी कोने में बेड भी रखना चाहिये। यदि आपने अपना बेड कमरे के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखा तो आपको ठीक से नींद नहीं आयेगी, आप तनाव से घिरे रहेंगे, आपको गुस्‍सा जल्‍दी आयेगा और बेचैनी सी बनी रहेगी।

3. बेडरूम की बाहरी दीवारों पर टूट-फूट या दरार नहीं होनी चाहिये। इससे घर में परेशानियां आती हैं।

4. यह वो रूम होता है, जहां आप दिन भर के सात से 10 घंटे तक बिताते हैं, यानी इसके वास्‍तु का सीधा प्रभाव आपके जीवन पर पड़ता है।

5. मकान के मालिक अगर उत्‍तर-पश्चिम दिशा में स्थित बेडरूम में सेते हैं, तो अस्थिरता बनी रहती है, लिहाजा इस दिशा में घर के मालिक का बेडरूम नहीं होना चाहिए। घर के अन्‍य सदस्‍यों का बेडरूम यहां हो सकता है।

5. घर के मालिक का बेडयम दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए, यदि किसी कारणवश नहीं है, तो दूसरा विकल्‍प दक्षिण या पश्चिम में हो सकता है।

6. बेड का सिरहाना दक्षिण की ओर होना चाहिये। इससे बेचैनी नहीं रहती है और रात में अच्‍छी नींद आती है उसका स्‍वास्‍थ्‍य उत्‍तम रहता है। उत्‍तर की तरफ सिर करके सोने से खराब सपने आते हैं और नींद अच्‍छी नहीं आती और स्‍वास्‍थ्‍य खराब रहता है। वहीं पूर्व की ओर सिर करने से ज्ञान बढ़ता है, जबकि पश्चिम की ओर सिर करके सोने से स्‍वास्‍थ्‍य खराब रहता है।

7. बेडरूम में कोई ऐसी तस्‍वीर मत लगायें, जो हिंसा दर्शा रही हो। बेडरूम की दीवार

मकान बनवाते वक्‍त वास्‍तु नियम क्‍यों जरूरी? Vastu Shastra

September 10, 2018
मकान बनवाते वक्‍त वास्‍तु नियम क्‍यों जरूरी? Vastu Shastra


मानव शरीर और ब्रम्हाण्ड पंचतत्वों से बना हुआ है, भवन भी पांच तत्वों का ही सम्मिश्रित स्वरूप है। ब्रम्हाण्ड, मानव शरीर, एंव भवन इन तीनों में स्थित पांच तत्वों का सामंजस्य स्थापित करके खुशहाल जीवन व्यतीत किया जा सकता है।

सूर्यः पूर्व दिशा के स्वामी एंव अग्नि तत्व के कारक है। ये पिता के भी कारक माने जाते हैं। कुदरती कुण्डली में सिंह राशि पंचम भाव का प्रतिनिधित्व करती है, इस कारण हाजमे पर विशेष प्रभाव पड़ता है। भवन में पूर्व की दिशा का ऊंचा होना या वहां पर दो छत्ती का निर्माण होने से महिलाओं को हड्डी रोग तथा सरकारी कर्मचारियों को आये दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य और सम्मानित जीवन जीने के लिये भवन पर इसका शुभ प्रभाव पड़ना जरूरी है।

चन्द्रः यह जल तत्व का कारक तथा भवन में इनका ईशान कोण (पूर्व-उत्तर), पर विशेष प्रभाव रहता है। सन्तुलित विचार धारा व शुभता बनायें रखनें में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यह माता का भी प्रतिनिधित्व करते है। इनका कार्य मुख्य रूप से जल संग्रह का है। इनके सन्तुलित होने से जातक को भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति आसानी से होती है तथा मन की चंचलता खत्म होती है। भवन के ईशान कोण में इनकों स्थापित करना शुभ माना जाता है।

मंगलः यह अग्नि तत्व के कारक है तथा भवन में दक्षिण दिशा पर इनका विशेष प्रभाव रसोई घर के रूप में होता है, इस कारण रसोई घर के नजदीक, पूजाघर, शौचालय, बाथरूम तथा स्टोर रूम इन तीनों का एक साथ होना किसी बड़े खतरे की सूचना देता है। यह स्थान दूषित होने पर घर के मुखिया को हार्ट अटैक होने की आशंका रहती है। फोर्स व मीडिया से जुड़े लोगो को आये दिन समस्याओं से जूझना पड़ता है। आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में रसोई घर स्थापित करने से मंगल का अमंगलकारी प्रभाव नही पड़ता है। 

बुधः यह ग्रह पृथ्वी तत्व का द्योतक है, तथा उत्तर दिशा जो सकारात्मक उर्जा का प्रवाह करती है, इस पर इनका विशेष प्रभाव रहता है। युवा तथा गणितज्ञ होने के कारण इनका छात्रों की शिक्षा एंव बैठक रूम में अधिकार क्षेत्र है, इसलिये इन्हे भी शौचालय, रसोई घर, कबाड़ घर आदि से दूर रखना चाहिये अन्यथा बच्चों की शिक्षा में बाधा एंव परिवार में कलह बनी रहती है।

गुरु: ये आकाश तत्व के कारक है तथा ईशान कोण का प्रतिनिधित्व करते है। भवन की जिस दिशा में पूजन गृह बनेगा वह स्थान इनका अधिकार क्षेत्र हो जायेगा। अतः पूजन गृह ईशान कोण में ही स्थापित करें। यह स्थान दूषित होने से- बुर्जुगों से मतभेद, ससुराल पक्ष से तनाव, आर्थिक तंगी, तथा परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद बना रहेगा।

शुक्रः ये चुम्बकत्व आकर्षण का प्रतीक है, तथा आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) के स्वामी है। शुक्र ग्रह आसुरों के देवता है, इनका सौन्दर्य तथा भोग विलास की वस्तुओं पर निवास स्थल है। इस स्थान के दूषित होने से शैया सुख में कमी, विदेश यात्रा में बाधायें, महिलाओं के स्वास्थ्य पर धन अधिक व्यय एंव सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी आयेगी।

शनिः ये वायु तत्व के कारक है, तथा पश्चिम दिशा पर इनका विशेष प्रभाव रहता है। ये न्याय एंव अनुशासन प्रिय है जिस परिवार में अन्याय, अनुशासन, गंदगी, मदिरा का सेवन, झूठ आदि होगा वहां के सदस्यों को आये दिन कष्ट बना रहेगा। घर की जिस दिशा में बेसमेन्ट, कूड़ा, अंधेरा, कबाड़ आदि होगा उस स्थान पर इनका स्थाई निवास स्थान माना गया है। पश्चिम दिशा के दूषित होने से- स्थान परिवर्तन, यात्रा में दुर्घटना, दाम्पत्य सुख में कमी, नौकरों का भाग जाना, घर में चोरी जैसी समस्यायें बनी रहेगी।

राहु एंव केतुः ये दोनो ग्रह नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) दिशा के कारक होते है। सीढि़यों पर तथा लम्बी गलियों में इनका विशेष प्रभाव रहता है। ये एनर्जी कारक ग्रह है, कुदरती कुण्डली में अष्टम भाव में वृश्चिक राशि पर विशेष प्रभाव रहता है। इस स्थान के दूषित होने से- दुर्घटना, आत्महत्या, पाइल्स रोग, खून की कमी तथा महिलाओं को गर्भपात की समस्या रहती है। 

भवन का निर्माण करते समय इन सभी ग्रहों को सही दिशा में स्थापित करके सकारात्मक उर्जा को प्राप्त किया जा सकता है।
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